महाभारत के युद्ध में एक ऐसा योद्धा था, जिसे आज भी अमर माना जाता है, गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र, अश्वत्थामा। कहा जाता है कि उसके माथे पर सदियों पुराना घाव है, शरीर से लगातार पीप और खून बहता रहता है, और वह पिछले 3000 साल से इस धरती पर भटक रहा है। लेकिन आखिर इसके पीछे की कहानी क्या है?
जन्म से मिला था दिव्य वरदान
अश्वत्थामा के जन्म के समय उसे एक दिव्य मणि प्राप्त हुई थी। इस मणि की शक्ति से वह देवता, राक्षस और मृत्यु—सभी से सुरक्षित रहता था। लेकिन महाभारत युद्ध के बाद उसने ऐसा पाप किया, जिसने उसकी किस्मत बदल दी।
युद्ध के बाद का पाप
महायुद्ध के अंत में जब अश्वत्थामा ने सुना कि उसके पिता द्रोणाचार्य को धोखे से मार दिया गया और कौरव सेना का अंत हो गया, तो वह क्रोध से पागल हो उठा। उसने पांडवों के वंश को मिटाने का निश्चय किया और ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने की ठानी। एक रात, वह चुपके से पांडवों के शिविर में घुसा और सोते हुए उनके पाँचों पुत्रों की हत्या कर दी।
कृष्ण का भयानक श्राप
जब पांडवों ने उसे पकड़ लिया, तो द्रौपदी ने उसे क्षमा कर दिया क्योंकि वह उनके गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था। लेकिन भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा को कठोर श्राप दिया।
“तुमने निर्दोष बच्चों की हत्या की है, इसलिए तुम 3000 साल तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे। तुम्हारे शरीर से हमेशा खून और पीप बहता रहेगा, और कोई भी तुम्हारा साथ नहीं देगा।”
कृष्ण ने उसकी मणि छीन ली और उसके माथे पर ऐसा घाव दिया जो कभी नहीं भरेगा।
आज भी जिंदा अश्वत्थामा
मान्यता है कि अश्वत्थामा आज भी जंगलों, नदियों और हिमालय के सुनसान इलाकों में घूमता है। कई लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने एक लंबे, घायल, खून से लथपथ साधु को देखा है, जो लगातार “नारायण-नारायण” जपता है। कहा जाता है कि वह कभी-कभी शिव मंदिरों में पूजा भी करता है, लेकिन लोग उससे दूर रहते हैं क्योंकि उसकी मौजूदगी से अचानक बीमारियाँ फैल सकती हैं।
कलयुग के अंत तक जीवित
पुराणों के अनुसार, अश्वत्थामा कलयुग के अंत तक जीवित रहेगा। जब भगवान कल्कि अवतार लेंगे, तब उसे मुक्ति मिलेगी। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि भगवान हनुमान ही उसे मोक्ष प्रदान करेंगे।